RJD के अधिकारिक ट्विटर अकाउंट से अपमानजनक ट्वीट, “तुम्हारे पप्पा मोदी खुद ट्वीट करते हैं?”

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aaj-tak-anchor-apologises-for-tweet-against-rabri-devi-social-media-is-calling-biased-thinking-IndiNews-राबड़ी देवी पर टिप्पन्नी के लिए आजतक ऐंकर ने माँगी माफी, सोशल मीडिया ने ऐंकर के सोच पर उठाया सवाल

अभी गली गलौज और अभद्र टिप्पणियों का मामला थमा नही था की नई घटना सामने आ गयी. इस बार यह कम कोई पत्रकार या किसी ट्रोल अकाउंट से नहीं बल्कि बिहार की सबसे बड़ी पार्टी के ऑफिसियल अकाउंट से किसी महिला के ऊपर आपत्तिजनक  टिपण्णी की गयी.

दरअसल हुआ कुछ ऐसे की शुभ्रस्था जो राइट विंग से प्रभावित है और कई मौकों पर बीजेपी का पक्ष रखती रही है ने राबड़ी देवी के शिक्षा को लेकर घेरते हुए अप्पतिजनक टिप्पन्नी करते हुए लिखा “कितने अच्छे दिन चाहिये @RabriDeviRJD जी? सचिवालय को शौचालय बोलने वाली निरक्षर बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री आज हिंदी में प्रधानमंत्री @narendramodi को लिखकर गाली दे रही हैं! दम है तो खुलेआम एक वर्तनी टेस्ट लेकर निरक्षरता से साक्षरता की अपनी यात्रा बताइए। या ये ट्वीट प्रायोजित है?”

शुभ्रस्था रबरी देवी के द्वारा प्रधानमंत्री के ऊपर किये लीची खाने वाले बयान का जबाव दे रही थी जिसमें बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा था “प्रधानमंत्री कि लीची कैसे खाते है? काटकर, चूसकर या वाश-बेसिन पर खड़ा होकर?”.

यह वही ट्विट है जिसको लेकर 2 दिन पहले आजतक के संपादक निशांत चतुर्वेदी निशाने पर आये थे और जिसके लिए चतुर्वेदी ने बाद में माफी भी माँगा. हमने इसको लेकर भी पोस्ट लिखा था.

दरअसल निशांत चतुर्वेदी के घटिया बयान के बाद सोशल मीडिया में राबड़ी देवी को व्यापक समर्थन मिला और यही कारण था की शाम होते होते आजतक के सम्पादक ने माफ़ी मांग ली.

निशांत चतुर्वेदी ने ना बस राबड़ी देवी बल्कि किसी भी महिला के लिए ऐसी टिप्पन्नी करना पूरी तरह ग़लत है ख़ासकर तब जब वे देश की बड़ी मीडिया कम्पनी में सम्पादक हों. लेकिन राजद के अधिकारिक ट्विटर अकाउंट से जो जवाब दिया गया वो और भी ख़राब है.

ऐसे अभद्र टिप्पन्नी करने से अच्छा होता राजद अदालत जाती और एक पूर्व महिला मुख्यमंत्री के लिए ऐसी बयानबाज़ी के लिए निशांत चतुर्वेदी पर मुकदम करती. राजद को समझना होगा की अगर वो ऐसी भाषा के प्रयोग करते हैं तो आपमें और निशांत चतुर्वेदी में क्या अंतर रह जाएगी.

तेजस्वी यादव और संजय यादव जो आजकल तेजस्वी के सलाहकार के तौर पर देखे जा रहे हैं ने इसे महिला के सम्मान से जोड़ते हुए इसे दुर्भाग्य पूर्ण बातया था जो सही भी था. लोकतंत्र में एक मात्र योग्यता जनता की समर्थन होती है जिसके सहारे राबड़ी मुख्यमंत्री बन पाई थी.

जो संविधान राबड़ी देवी को सम्मान पूर्वक मुख्यमंत्री बनने का अधिकार देता है वही संविधान दुसरे भारतीय को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार देता है. यदि राबड़ी देवी एक महिला और माँ हैं किसी की तो उसी तरह दूसरी महिलायें किसी की माँ, बहन और बेटी है.

राजद के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ऐसी प्रतिक्रिया और पार्टी के दोहरे रवैये के जैसा है, जिसे ऐसा दिखता है कि ईमान बस अपनों के लिए जगता है जो की दुर्भायपूर्ण है. खासकर तब जब पार्टी की कमान युवा ब्रिगेड के हाथों में है जो हर सार्वजनकि मंच से नारी सम्मान और सामाजिक समरसता का बात करते नज़र आते हैं. राजनीति में इस तरह बयानों का स्तर दिनों दिन नीचे गिरना एक ख़राब संकेत है ख़ास कर तब जब देश के युवा समेत ज़्यादातर नागरिक राजनीति के प्रति जागरूक हो रहे हैं और राजनीति में अपनी दिलचस्पी ले रहे हैं. नेताओं और राजनीतिक पार्टियों को ये प्रयास करना चाहिए की देश की राजनीति में दिलचस्पी लेने वाले लोगों को एक अच्छा माहौल एक अच्छा वातावरण दें जिससे की लोगों का राजनीति के प्रति सही सोच बने और सही दिशा में सोचें.

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