सीएम खट्टर ने पहले दिया कश्मीर और बिहार की लड़कियों पर अपमानजनक बयान, बाद में बताया मजाक

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Image Credit: outlookhindi.com

गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी ने बिल्कुल नहीं सोचा होगा की जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले को पार्टी के ही छोटे बड़े नेताओं द्वारा ऐसे अपमानित किया जायेगा. अमित शाह द्वारा जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के प्रभावों को ख़त्म करने की घोषणा के बाद सदन के बाहर भीतर नेताओं और देश भर के लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया विभिन्न माध्यमो से साझा किया है लकिन कुछ प्रतिक्रियाएं ऐसी है जो सरकार के प्रयासों पर पानी फेर रही हैं.

नेताओं और देश की जनता को सबसे पहले ये समझना जरुरी है की जम्मू कश्मीर हमेशा से देश का हिस्सा था, सरकार ने सिर्फ वहां लागु होने वाले कानून में बदलाव किया है न की देश की सीमा से बाहर के किसी राज्य पर कब्ज़ा कर अपने देश में मिलाया है. कश्मीर के लोग भी उतने ही भारतीय हैं जितने बाकि राज्यों के लोग, ऐसे में जब कोई जम्मू-कश्मीर मामले में बयान देता है तो थोरी संयम और समझदारी का सहारा लेना चाहिए.

जम्मू-कश्मीर मामले पर किसी को भी ऐसे बयानबाजी नहीं करनी चहिये जिसका फ़ायदा अनुच्छेद 370 हटने के विरोध कर रहे देश के बहार और भीतर के लोगों को मिले; चाहे किसी भी इरादे के साथ कहा जा रहा हो लेकिन वहाँ ज़मीन खरीदने और कश्मीरी लड़कियों से शादी करने जैसे बयानों से कहीं न कहीं उन आरोपों को बल मिलेगा जो इस बदलाव के विरोधी लगा रहे हैं. बेतुकी बयान से इस पुरे प्रक्रिया को नुकसान तब और अधिक होता है जब सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के तरफ से ऐसे बयान आते हैं.

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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के भाजपा विधायक विक्रम सैनी ने एक ऐसा ही बयान दिया. सैनी ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने से पार्टी के कार्यकत्ता काफी उत्साहित थे, क्योंकि अब वे ‘गोरी’ कश्मीरी लड़कियों से शादी कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि अब भाजपा के अविवाहित कार्यकर्ता कश्मीर में जमीन खरीदने के साथ ही वहां की लड़कियों से शादी कर सकते हैं. यकीनन ये भाजपा विधायक का वैक्तिगत बयान हो सकता है लेकिन इस बयान में जिस तरह के भाषाओँ को इस्तेमाल किया गया है उससे पार्टी और सरकार की छवि को नुकसान पहुचता है.

आज एक और भाजपा नेता के बयान को लेकर चर्चा है, खबरें है की हरियाणा में भाजपा सरकार के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने एक विवादित बयान दिया है. कथित रूप से खट्टर ने कहा की ‘अब हम भी ला सकते हैं कश्मीरी बहू’. ये खबर पूरी तरह सच नहीं है और पूरी तरह गलत भी नहीं, ज्यादातर मीडिया में खट्टर का अधुरा बयान चलाया जा रहा है जो गलत है. खट्टर के जिस बयान को लेकर हंगामा हो रहा है वो फरीदाबाद के एक सभा का है, दरअसल हरियाणा के CM प्रधानमंत्री मोदी के बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के बाद हरियाणा में प्रति हज़ार लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या में इजाफा की बात कर रहे थे. खट्टर ने अपने बयान में कहा “जो जेंडर रेश्यो लड़कियों की संख्या 1000 लडको के पीछे 850 थी अब 1000 लड़कों के पीछे वही लड़कियों की संख्या 933 हो गयी है.”

खट्टर ने इसी दौरान आगे कहा “ये समाज में परिवर्तन का काम है, आखिर बुजुर्ग लोग नौजवान लोग कोई भी इस बात को समझेगा, आने वाले समय में ये संकट खड़ा हो सकता है की लड़कियां कम और लड़के ज्यादा हो जाए, तो हमारे धनखड़ जी ने कहा की बिहार से लानी पड़ेगी, अब कुछ लोग कह रहे हैं अब तो कश्मीर भी खुल गया है वहां से ले आयेंगे.” खट्टर ने आगे कहा “मजाक की बात अलग है लेकिन समाज में रेश्यो ठीक होगी तो संतुलन ठीक बैठेगा”

खट्टर भाजपा के कोई मामूली कार्यकर्त्ता नहीं हैं, एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उन्हें समझ होनी चाहिए अपने पद की जिम्मेदारी की. खट्टर को समझना चाहिए की जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री किसी सभा को संबोधित करते हैं तो बड़ी संख्या में और दूर तक लोगों के बिच उनकी आवाज पहुँचती है, वो चाहे मीडिया के माध्यम से हो या सभा में मैजूद जनता और कार्यकर्ताओं के माध्यम से. यहाँ ये समझना भी जरुरी है की कश्मीर की हालात या वहां से लड़कियां लाने जैसी बेतुकी बातें करना कोई मजाक नहीं है, कश्मीर और वहां से जुड़े मामले अभी पहले से अधिक संवेदनशील है क्योंकि जम्मू, कश्मीर, और लद्दाख अभी आज़ाद भारत के इतिहास के सबसे बड़े बदलाव से गुजर रहा है ऐसे में मुख्यमंत्री जैसे बड़े पद पर बैठे नेता को ऐसी भद्दी टिपण्णी की आवाज नहीं बनानी चहिए.

मुख्यमंत्री जी आप इसे मजाक का नाम देकर खुदको बचाने का प्रयास करें लेकिन आपको समझना होगा की आपने इस प्रकार की बातें कर संकीर्ण सोच रखने वाले नासमझ लोगों की बेतुकी और अपमानजनक बातों को मुख्यमंत्री जैसे एक महत्वपूर्ण पद का इस्तेमाल करने का मौका दिया है. मुख्यमंत्री खट्टर को समझना चहिये की देश ही नहीं देश के बहार भी कश्मीर में हुए क़ानूनी बदलाव का विरोध करने वाले लोग आपके इस मजाक में कही बातों का गलत इस्तेमाल करेंगे. पार्टी या खुद खट्टर मजाक के नाम पर इस बयान से बचने का प्रयास तो कर सकते हैं लेकिन वास्तव किसी भी प्रकार से ऐसी बयानबाजी करना उतना की गलत है जितना ये बिना मजाक शब्द के इस्तेमाल का होता.

नेताओं को किसी भी सूरत में ऐसी बेतुकी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए क्योंकि जब एक नेता कोई बयान देता है तो वो दूर तक और अधिक लोगों तक पहुँचता है, ऐसे में लोगों के बिच एक गलत धरना बनती है जो जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे के लिए बेहद नुकसानदेह है. खट्टर का ये बयान न सिर्फ कश्मीर बल्कि बिहार की लड़कियों के प्रति भी अपमानजनक है. ऐसे किसी राज्य की बेटियों को अपमान नहीं किया जा सकता है फिर वो बिहार हो, कश्मीर हो या कोई अन्य राज्य. खट्टर ने मजाक में ऐसा कहा है तब भी, ये बिहार और कश्मीर की सभी लड़कियों और उनके परिवारों का मजाक बनाना है और अपमानित करने जैसा है.

इस मामले में सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है, वही दिल्ली की महिला आयोग ने FIR दर्ज करने की मांग उठाई है. दिल्ली और हरियाणा दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इसलिए शायद ही विरोधी पार्टियाँ इस मामले को जल्द थमने दे.

राज्यसभा में बीजेपी सांसद विजय गोयल ने भी अपने आवास के बाहर कश्मीर को लेकर एक पोस्टर लगवाया है जो विवादों में है. पोस्टर पर एक कश्मीरी लड़की मुस्कारा रही है और पोस्टर पर लिखा है, “धारा 370 का जाना तेरा मुस्कराना.” गोयल के ट्वीट पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने गोयल को जवाब दिया, “कितनी घटिया सोच है. हिम्मत है तो अपनी बेटी की तस्वीर घर के बोर्ड पर लगाओ. एक तरफ हमारे प्रधानमंत्री कश्मीर का दिल जीतने की कोशिश कर रहे है, दूसरी तरफ उनके मंत्री कश्मीरी लड़कियों के प्रति अपनी गंदी सोच उजागर कर रहे हैं! कार्यकर्ताओं की क्या गलती जब नेता ही ऐसी ओछी सोच रखते हैं.”

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