JDU पश्चिम बंगाल के 75 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी !

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बिहार में LJP का चुनाव में योगदान परम्परागत राजनीति से बहुत अलग था, LJP के नेता NDA में रहते हुए खुल कर बिहार में NDA की तरफ CM उम्मीदवार नीतीश कुमार और उनकी पार्टी JDU के खिलाफ प्रचार करते रहे. हालाँकि इसके बाद भी चुनाव में बेहद रोमांचक जीत हासिल कर नीतीश कुमार लगातार चौथी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने. पर, अभी तक LJP पर NDA के तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

नीतीश कुमार की पार्टी को चुनाव में सिर्फ़ 43 सीटें मिली और भाजपा को 74 और फिर भी नीतीश कुमार को ही बिहार का CM बनाया गया. लेकिन इस चुनाव में नीतीश कुमार और उनकी पार्टी का कद तो कम हो ही गया जिसका एक प्रमुख कारण LJP को माना जा रहा है क्योंकि चिराग पासवान ने JDU के सभी उम्मीदवारों के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारा जिसमें मुख्यतः भाजपा और जेडीयू के ही कार्यकर्ता थे.

बिहार चुनाव में कई सीटों पर एलजेपी के वोट काटने की वजह से ही जेडीयू के उम्मीदवार हार गए. नतीजा यह हुआ कि जेडीयू यहां बीजेपी से पिछड़ गई. जेडीयू के कई नेता मानते हैं कि असल में बीजेपी ने ही यह खेल रचा था. अंदाज़ा लगाया जा रहा है की राजनीति के माहिर खिलाड़ी नीतीश कुमार अब हिसाब-किताब के लिए सही मौका तलाश रहे हैं.

LJP के नेता चिराग पासवान भाजपा के साथ रहकर भी खुल कर खुदको मोदी का हनुमान बता रहे थे और नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने की बात कर रहे थे. क्या 2021 में नीतीश कुमार इसी का बदला लेना चाहते हैं, क्योंकि JDU (जेडीयू) नेता गुलाम रसूल बलयावी ने गुरुवार को कहा कि पार्टी 2021 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में 75 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी.

अगर नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल में अपने उम्मीदवार उतारते हैं तो क्या उससे भाजपा को वही नुक़सान उठाना परेगा जो बिहार में JDU को उठाना परा या इसमें भाजपा का ही फ़ायदा है. माना जा रहा है कि जेडीयू के चुनाव लड़ने से कई सीटों पर बीजेपी के वोटों का बंटवारा हो सकता है. बीजेपी इस बार यहां सत्ताविरोधी मतों के जरिए जीत हासिल करने के प्रयास में है. ऐसे में टीएमसी विरोधी मतों के बंटवारे का सीधा मतलब होगा कि वोट बीजेपी के कटेंगे.

कई सीटों पर एलजेपी के वोट काटने की वजह से ही जेडीयू के उम्मीदवार हार गए. नतीजा यह हुआ कि जेडीयू यहां बीजेपी से पिछड़ गई. जेडीयू के कई नेता मानते हैं कि असल में बीजेपी ने ही यह खेल रचा था. कुछ जानकार बताते हैं कि जेडीयू में इस बात को लेकर टीस जरूर है. नीतीश कुमार राजनीति के बेहद माहिर खिलाड़ी हैं और हिसाब-किताब के लिए सही मौका तलाश ही लेते हैं.

अब इस मामले में कोई भी पक्की ख़बर 26 दिसंबर से पटना में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद आ सकती है, JDU की इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की अगुआई में अन्य बड़े नेता मंथन करेंगे. बिहार चुनाव परिणाम की समीक्षा के साथ ही बिहार से बाहर पार्टी के विस्तार को लेकर चर्चा होने वाली है. पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने के फैसले पर भी अंतिम मुहर इसी बैठक में लगाई जाएगी.

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