सुप्रीम कोर्ट में पकड़ी गई भाजपा की चोरी, कोर्ट ने अमान्य किए गए आठ बैलट पेपर वैध पाया

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CJI commented on the Chandigarh Mayor election as a murder of democracy
Image Credit: AajTak

चंडीगढ़ बीजेपी (BJP) के पूर्व पदाधिकारी रहे और चंडीगढ़ नगर निगम के मनोनीत पार्षद अनिल मसीह ने चंडीगढ़ चुनाव में जो चोरी कि अब वो क़ानूनी तौर पर पकड़ी जा चुकी है. सुप्रीम कोर्ट में CJI की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच ने BJP के पूर्व पदाधिकारी द्वारा पीठासीन पदाधिकारी के तौर पर चंडीगढ़ मेयर चुनाव के दौरान अमान्य किए गाए 8 मतों को वैध पाया. ये सारे वोट आम आदमी पार्टी (AAP) के समर्थन में थे इसलिए CJI ने आम आदमी और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद AAP के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को चंडीगढ़ के नए मेयर बने. सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जनवरी को मेयर चुनाव के संचालन में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद, निर्वाचन अधिकारी अनिल मसीह के खिलाफ “कदाचार” के लिए मुकदमा चलाने का भी आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह पूरी चुनावी प्रक्रिया को रद्द नहीं कर रही है और खुद को मतगणना प्रक्रिया में गलत कार्यों से निपटने तक ही सीमित रख रही है. सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए गाए 8 मतों को सुप्रीम कोर्ट माँगा कर खुद देखा और सभी आठ बैलट पेपर वैध पाया.

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को 12 वोट मिले थे. आठ मतों को गलत तरीके से अमान्य करार दे दिया गया. बाद में ये आठ वोट याचिकाकर्ता के पक्ष में पाए गए हैं. इस तरह आठ मतों को जोड़ देने पर याचिकाकर्ता के 20 वोट हो जाते हैं. लिहाजा, AAP पार्षद और याचिकाकर्ता कुलदीप कुमार को चंडीगढ़ नगर निगम के महापौर पद पर निर्वाचित घोषित किया जाता है. पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह द्वारा भाजपा प्रत्याशी को विजेता घोषित करने का फैसला अमान्य है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिया गया है कि वह चुनावी प्रक्रिया में धांधली करते पाए गए अनिल मसीह को नोटिस जारी करें कि क्यों न उनके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्रवाई शुरू की जाए.

अदालत में झूठ बोलने के लिए कानूनी कार्रवाई के दायरे में आए मसीह को इस मामले में आईपीसी की धारा 195 के तहत सात साल तक की सजा हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट का ये त्वरित फैसला लोकतंत्र, चुनाव और क़ानून में भरोसा रखने वाले लिए एक उम्मीद की किरण है. अभी वो दौर है जहां BJP द्वारा विपक्षी पार्टियों, जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को जाँच एजेंसी के ताक़त पर तोड़ना और गौर क़ानूनी तरीके से BJP या BJP समर्थित सरकार बनाना आम बात हो गई है. वैसे तो सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल हमेशा से सत्ता अपने फ़ायदे के लिए करती रही है, चाहे वो किसी भी पार्टी की सरकार हो, लेकिन पिछले दस वर्षों में मोदी सरकार ने सरकारी विभागों और जाँच एजेंसियों के सहारे BJP के फ़ायदे के लिए जो किया वो चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की हत्या है. शायद इसीलिए चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के दौरान हुई धांधली पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा की वे लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे और सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित फैसला कर देश में लोकतंत्र को बचा लिया, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट तक इस मामले में असहाय दिख रही थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र और देश के साथ अन्याय होने से बचा लिया.

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में BJP के कारनामे दिखाता है की पार्टी चुनाव जितने के लिए क्या कर सकती. इस चुनाव ने सरकार की गोद में बैठी, मानसिक दिवालिया और बेशर्मी की हद पर कर चुके न्यूज़ ऐंकर का असली चेहरा भी देश के सामने लाया. साथ ही, सत्ता के एक इशारे पर आग में कूदने देश में आग लगाने को तैयार मीडिया के सोच, समझ और बौधिक छमता को भी जनता ने देखा.

देश ने देखा कि कैसे अपने मालिकों के इशारे पर देश की मेनस्ट्रीम मीडिया लगी हुई थी ग़लत को सही और सही गलत साबित करने में, समझ नहीं आता खुद को पत्रकार बताने वाले सुशांत सिन्हा जैसे ढीले लोगों पर अदालत कार्रवाई क्यों नहीं करती, क्यों नहीं ऐसे लोगों को ग़लत खबर फैलाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता?

क्या गोदी मीडिया और गोदी ऐंकर की इतनी भी समझ नहीं है कि इसी तरह चलता रहा तो जिस काम की कमाई वे खाते हैं और अपना परिवार चलाते हैं वो काम ही नहीं बचेगा! एक दिन ऐसा होगा जब लोग TV देखना बंद कर देंगे; बड़ी संख्या में लोगों ने न्यूज़ के लिए TV देखना बंद कर दिया है, बहुत जल्द ऐसा होगा जब TV न्यूज़ चैनल की कोई साख नहीं बचेगी. सत्ता के इशारे पर ये लोग जिस धंधे की कमाई खा रहे उसे ही खत्म कर लेंगे! शायद यही इंसाफ़ भी होगा उन लोगों के लिए जो गोदी मीडिया के द्वारा फैलाए जा रहे सत्ता समर्थित फेक न्यूज़ के शिकार हो रहे हैं.