क्या मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजोव गाँधी को लेकर दिए बयान में लक्ष्मण रेखा लाँघि?

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शनिवार को नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा में राहुल गांधी पर टिप्पन्नी करते हुए कहा “आपके पिताजी को आपके रागदरबारियों ने मिस्टर क्लीन बना दिया था. गाजे बाजे के साथ मिस्टर क्लीन बना दिया था. लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में उनके जीवनकाल समाप्त हो गया.”

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विरोधियों ने इसे शर्मनाक, घटिया और हताशा जैसी विशेषण से नवाज़ा. किसी ने कहा की यह बयान नही देना चाहिए था क्योंकि राजीव गाँधी अब जीवित नही है तो किसी ने कहा राहुल के पिता की बात करना गलत है. मैं भी मानता हूँ की पीएम मोदी या किसी को अपने विरोधियों पर माता-पिता जैसे सम्बोधन के बाद इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए, या तो पीएम मोदी सीधे राहुल गांधी या सीधे सीधे राजीव गांधी पर आरोप लगा सकते हैं लेकिन आपके पिता जैसे संबोधन अशोभनीय है. शायद मोदी का यह बयान गलत था लेकिन यह पहला मौका नही है जब इस तरह का बयान दिया गया हो. ऐसे बयानों का सामना खुद मोदी को लम्बे समय से करना पड़ा है.

उदाहण स्वरूप माननीय सोनिया जी का मोदी को “मौत का सौदागर” कहना जब वो मुख्यमंत्री हुआ करते थे या फिर प्रियंका वाड्रा जिसने मोदी को सार्जनिक मंच से “नीच” कह कर बुलाया था. उसके अलावा राहुल जी का मौत से जूझ रहे परिकर से मिलने के बाद बोला गया झूठा राजनीतिक बयान जिसमे उसने अनावश्यक तरीके से उनके और परिकर के मुलकात को मोहरे की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की. माननीय लालु जी ने भी मोदी को “नर पिचास” की उपाधि से नवाजा था. राहुल वीर सावरकर को डरपोक और ब्रिटश का एजेंट भी बार बार कहते रहे हैं.

परन्तु कांग्रेस ने इस बार विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश और मोर्चा संभाला भाई बहन ने और फिर साथ आयी अपने आप को बुद्धिजीवी कहने वालों का एक वर्ग. इसी बिच हम ये बता दें की मोदी जी के माँ को भी कांग्रेस ने बार बार विवादों में घसीटा है. जब वो नोटबंदी के समय के बैंक गयी तो उसे भी राजनीति से जोड़ दिया था.

राहुल गांधी ने मोदी के इस बयान के जवाब में कहा ‘मोदीजी, लड़ाई खत्म हो चुकी है. आपके कर्म आपका इंतजार कर रहे हैं. खुद के बारे में अपनी आंतरिक सोच को मेरे पिता पर थोपना भी आपको नहीं बचा पाएगा. सप्रेम और झप्पी के साथ- राहुल.’
तो वहीं प्रियंका वाड्रा कहती हैं “ शहीदों के नाम पर वोट माँगकर उनकी शहादत को अपमानित करने वाले प्रधानमंत्री ने कल अपनी बेलगाम सनक में एक नेक और पाक इंसान की शहादत का निरादर किया। जवाब अमेठी की जनता देगी जिनके लिए राजीव गांधी ने अपनी जान दी। हाँ मोदीजी ‘यह देश धोकेबाज़ी को कभी माफ नहीं करता’। “

राहुल का बयान सधा हुआ था परन्तु प्रियंका का बयान नाटकीय अंदाज़ और झूठा था क्योंकि राजीव गाँधी की जब हत्या हुई वो किसी भी सवैधानिक पद पर नहीं थे. वो अपने पक्ष में राजनैतिक सभा करने जा रहे थे और आतंकियों ने दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से उनको अपना निशाना बनया. उनकी हत्या हुई थी ना की वो शहीद हुए थे, साथ ही उनके द्वारा लिए गये बहुत सारे निर्णय विवादास्पत रहे थे. उनमे से प्रमुख थे भोपाल गैस कांड के आरोपी को सुरक्षित देश के बहार भेजना वह भी सरकारी तंत्र के सहयोग से, 1984 के दंगे के बारे में कहना बड़े पेड़ गिरते हैं तो बहुत पौधे उसमे दब जाते हैं, या फिर शाह बानो का चर्चित मुकदमा जिसमे राजीव उच्चतम न्यायाल के आदेश को ही पलट दिया था और बोफोर्स घोटाला जिसमे क्वात्रोक्की से उन्हें पैसे मिलने का आरोप लगा था. हालाँकि तथाकथित बोफोर्स घोटाले में अदालत ने उन्हें क्लीन चीट दे दिया था.

राजीव गाँधी ने बहुत अच्छे कार्य भी किये जिसमे आईटी सेक्टर को बढ़ावा एक उत्कृष्ट उदहारण है परन्तु वो बेदाग थे ऐसा भी नही है. शाह बानो केस में उच्चतम न्यायालय का उनके द्वारा जो मजाक बयाना गया वो संविधान की हत्या से कम नही था जिसकी चिंता अभी सबसे ज्यादा राहुल को होती है.

कुछ का तर्क था उनके देहांत के बाद उनका चर्चा होना सही नहीं है परन्तु ऐसा कहने वाले लोग ये भूल जाते हैं की जब किसी देश के मुखिया के तौर पर काम कर चुके हों तो आप देश के इतिहास का हिस्सा हो जाते हैं और उन सभी कार्यों की समीक्षा हमेशा होगी तथा यह होती भी रही है. इसका ताज़ा उदहारण है IC814(कंधार विमान अपहरण) मामले में मसूद अजहर को छोड़ने को लेकर वाजपेयी सरकार को घेरना जो गलत नही है क्यों जब तक हम अपने पुराने ग़लतियों को सुधारेंगे नहीं खतरा बनी रहेगी.

जब कांग्रेस और गाँधी परिवार अपने पूर्ववर्ती नेताओं के किये गए योगदान को बार बार सामने रखती है तो फिर उनको अपने महान नेता के कार्यकाल में हुए गलतियों की आलोचना के लिए भी तैयार रहना होगा.

अच्छा होता राहुल और प्रियंका वाड्रा तथ्यों के साथ कहती की राजीव जी गलत नहीं थे बजाय मोदी को आदर्शवाद के पाठ पढ़ने के. क्योंकि समय-समय पर खुद गाँधी परिवार और उनके कुनबे दूसरों पर आपत्तिजनक जनक टिप्पणियां की है.

जितना गलत मोदी का बयान उससे कहीं कम राहुल का बयान नही था जब उसने गंभीर रूप से बीमार परिकर को विवाद में घसीटा या प्रियंका वाड्रा का मोदी जी के लिए “नीच” वला बयान हो या फिर सोनिया जी एक प्रदेश के मुख्यमंत्री को “मौत का सौदागर” कहना. उम्मीद यही कर सकते हैं हमारे राजनेता अपने भाषा पर संयम रखें और दूसरों पर अनावश्यक टिपण्णी करने से बचें. ऐसा लगता है कि अभी के समय में लक्षमण रेखा धूमिल हो चुकी है जिसे पुनः नये शीरे से उकेरने की जरूरत है जो सभी राजनेताओं की जिम्मेदारी है.

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