सारदा चिटफंड स्कैम, पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला

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शारदा चिटफंड स्कैम पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला -sharda-chit-fund-scam-one-of-the-biggest-economic-scam-of-west-bengal-IndiNews-Free Hindi News Online
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सारदा चिटफंड स्कैम पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला है. जिससे कई बड़े राज्य और केंद्रीय नेताओं के नाम जुड़े हैं. दरअसल, इस सारदा ग्रुप कंपनी पर आरोप है कि पैसे ठगने के लिए लोगों से लुभावने वादे किए थे और रकम को 34 गुना करके वापस करने का वादा किया गया था. इस घोटाले में करीब 40 हजार करोड़ की हेर-फेर हुई थी. साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि इस मामले की जांच करे साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस को जांच में सहयोग करने का आदेश भी दिया था.

कब और कैसे शुरुआत हुई?

सारदा ग्रुप कंपनी की स्थापना 2008 में हुई थी। सुदीप्ता सेन शारदा ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे | शारदा ग्रुप ने बहुत नियोजित तरीके से छोटे निवेसकों को अपना सिकार बनाया. साथ ही एजेंटों 25% तक की हिसेदारी दी गयी | चार साल में इस कंपनी ने बंगाल, असम और ओडिशा में करीब 300 ऑफिस खोल लिए, करीब 17 लाख निवेशक जुटा लिया । इस दौरान ग्रुप ने करीब 4 बिलियन डॉलर (40 हजार करोड़) रुपए की कमाई की थी। यह ग्रुप अप्रैल 2013 में बंद हो गया था।

घोटाला कब सामने आया?

पश्चिम बंगाल का चर्चित चिटफंड घोटाला 2013 में सामने आया था। कथित तौर पर तीन हजार करोड के इस घोटाले का खुलासा अप्रैल 2013 में हुआ था। आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों के पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किया। इस घोटाले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल उठे थे।

क्या होता है चिटफंड?

चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे। इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए। जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए। इसमें बोली लगाने वाले शख्स को पैसे लौटाने भी होते हैं।

नियम के मुताबिक ये स्कीम किसी संस्था या फिर व्यक्ति के जरिए आपसी संबंधियों या फिर दोस्तों के बीच चलाया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया दखल?

राज्य सरकार की जांच से संतुष्ठ नहीं होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को शारदा चिट फंड घोटाले की जांच करने के आदेश दिए. सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद पश्चिम बंगाल में केंद्र की जांच एजेंसी ED ने मामले की जांच शुरू की. अप्रैल 2014 में ED ने शारदा ग्रुप के चैयरमैन सुदीप्त की पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया. ED ने इस मामले में टीएमसी के सासंद अहमद हसन और अर्पिता घोष से भी पूछताछ की.

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मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी हुई सारी जांच CBI को ही करने को कहा. सुप्रीम कोर्ट की आदेश के बाद बंगाल सरकार की एसआईटी ने भी सारी जानकारी CBI को दे दी. जांच को आगे बढ़ाते हुए CBI ने नंवबर 2014 टीएमसी के सासंद सिरनजॉय बॉस को शारदा घोटाले के साथ जुड़ा होने की वजह से गिरफ्तार किया साथ हीं दिसबंर 2014 में CBI ने बंगाल सरकार के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर मदन नित्रा को भी घोटाले से जुड़े होने के आरोपों के चलते गिरफ्तार किया.

राजीव कुमार का क्या है रोल?

राजीव कुमार पर आरोप है की उसने मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट किया है या फिर उसे सीबीआई को नही दिया. पुरे प्रकरण में लाल डायरी का नाम बार बार आ रहा है. जिस लाल डायरी पर वबाल मचा है उस पर सारदा ग्रुप के चेयरमैन, सुदीप्तो सेन का बयान सामने आया है। सेन ने लाल डायरी के अस्तित्व के बारे में स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें शारदा समूह की संपत्ति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में सभी विवरण थे लेकिन अब यह कहां है किसी को नहीं पता.

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चिटफंड घोटाले पर ममता सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया था जिसके प्रमुख राजीव कुमार थे। सुदीप्त सेन और उनकी सहयोगी देवजानी मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था। फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई पूछताछ में देवजानी ने बताया था कि एसआईटी ने उनके पास से एक लाल डायरी, पेन ड्राइव समेत कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे, तब से ही सीबीआई उक्त पेन ड्राइव और डायरी को तलाश कर रही है और इसी को लेकर CBI राजीव कुमार से पूछताछ करना चाह रही है.

चिंदबरम की पत्नी के खिलाफ भी आरोप पत्र

सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दावा किया है कि चिट फंड घोटाले में घिरे सारदा ग्रुप की कंपनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रुपये मिले।

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