राफेल डील की अनसुलझी पहेलियाँ

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लीक हुए राफेल दस्तावेज की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में मंजुरी - मोदी सरकार के लिए झटका - IndiNews

जैसा की देश के सभी जाने माने पत्रकारों और नेतओं द्वारा पिछले कुछ दिनों से मांग किया जा रहा था की राफेल मुद्दे पर प्रधानमंत्री या रक्षा-मंत्री को सवालों के जवाब देना चाहिए , आज सरकार की ओर से रक्षामंत्री सीतारामन ने इंडिया टुडे ग्रुप को विस्त्रित इंटरव्यू दिया और अपनी बाते रखीं| इस मुद्दे पर पहली बार ऐसा लगा की बीजेपी का होमवर्क अब करीब करीब हो गया है| रक्षा-मंत्री ने सरे सवाल के जवाब विस्तृत और तथ्यों के आधार पर देने की कोशिश की जिसमें बहुत हद तक सफल होती भी दिखीं|

रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के द्वारा फैलाये जा रहे झूठ को तथ्यों के साथ ख़ारिज किया | इसी विषय पर हमने भी कुछ जानकारियां जुटाई है| कांग्रेस ने बार बार ये आरोप लगा है की 30,000 करोड़ का रिलायंस को दे दिया गया है !!

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Image: Twitter

रफेल ओफ़्सेट डील को जानें।

राफेल डील 58,000 करोड़ का है जिसके तहत ओफ़्सेट की कुल रकम 30,000 करोड़ के3 लगभग बनता है| राफेल प्रोजेक्ट में कुल 4 कंपनियाँ शामिल है – Dassault, Safran, Thales and MBDA और ओफ़्सेट पर भी सभी का पूर्व निर्धारितअधिकार है| अनुमानित ओफ़्सेट की रकम मे Dassault- 15,000 करोड़, Safran-6,500 करोड़, Thales-5,500 करोड़ and MBDA-3,000 करोड़ की हिस्सेदारी बनती है| राफेल ने रिलायंस के साथ करार किया है जो की तकनिकी रूप से किसी भी हालत मे 15000 करोड़ से ज्यादा नही हो सकता है| Safran का DRDO के साथ कावेरी इंजन प्रोजेक्ट को पूरा करने पर सहमती बनने की बात कही जा रही है| जो की LCA तेजस प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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इंजन के बिना तेजस कभी भी स्वदेशी नही कहा जा सकता क्योंकि तेजस के इंजन के लिए हमे अमेरिकी कंपनी के GE404 को इस्तेमाल करना पर रहा है| बांकी की दो कंपनियों ने अभी तक इस बारे मई ज्यादा जानकारियां सार्वजनिक नही की है|
विभिन्न समाचार माध्यमों ने दावा किया है की लगभग 50 कंपनियों को ओफ़्सेट कॉन्ट्रैक्ट दिया है जिसमें प्रमुख भागीदार है DRDO, L&T, Mahindra Group, the Kalyani Group and Godrej & Boyce इत्यादि|

जैसे जैसे जानकारी मिल रही है विरोध करने वाले भी घोटाले को छोटा करते जा रहे है इसका उदाहरण प्रशांत भूषण के ट्विट से मिलता है जो अब 20,000 करोड़ की ही बात कर रहे है|

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