दिल्ली की जनता से स्कूल के झूठे वीडियो दिखाकर और मस्जिदों को तोड़ने के नाम पर वोट माँग रहे BJP सांसद

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Image Credit: newslaundry.com

दिल्ली में दिशाहीन चुनावी मुद्दों का पीछा करते-करते BJP बहुत आगे निकल गई है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी के पास क्या अब भी झूठ और धार्मिक ध्रुवीकरण के अलावा कोई मुद्दा नहीं है? शायदा नहीं, और यही कारण है कि दिल्ली में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के बड़े-बड़े नेता और मंत्री खुलेआम चुनावी सभाओं में हिन्दू-मुस्लिम और गोली मारने की बात कर रहे हैं.

हालाँकि बीजेपी नेताओं के माहौल बिगाड़ने वाले सांप्रदायिक बयानों के बाद हमेशा के तरह चुनाव आयोग नोटिस भेज रही और जैसा हम पिछले लोकसभा चुनाव में देख चुके हैं, देश की महान चुनाव आयोग बीजेपी नेताओं का इससे अधिक कुछ कर भी नहीं पाती इसलिए EC से कार्रवाई की उम्मीद नहीं किया जा सकता ये बीजेपी के नेता अच्छी तरह जानते हैं इसीलिए बेखौफ कुछ भी बोलते हैं.

देश में दशकों में सबसे अधिक बेरोजगारी है, मंहगाई आसमान को छु रही है और GDP पाताल में जा रही; कॉलेज, यूनिवर्सिटी के छात्र सड़क पर है लेकिन देश के गृह मंत्री भरी सभा में झूठ बोल रहे और वित्त राज्य मंत्री गोली मारने के नारे लगा रहे. अनुराग ठाकुर ने एक सभा में “देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को” नारे लगवाए, जब ये नारा लगाया जा रहा था तब स्टेज पर पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह समेत अन्य बीजेपी के नेता भी मौजूद थे.

चुनाव कोई भी हो चुनाव आते ही बीजेपी नेताओं में होड़ लग जाती है जहर उगलने और झूठ बोलने की, क्या पार्टी में सिर्फ उन्हीं बातों को अहमियत दी जाती है? क्या यही कारण है कि ऐसे मामलों में सांप्रदायिक और धार्मिक माहौल बिगाड़ने वाले बयान देने वालों के खिलाफ पार्टी या कोई सरकारी विभाग कुछ नहीं कर पाती.

AAP से फुदक कर BJP की नैया में सवार होते ही कपिल मिश्रा के बोल बदल गये हैं, बीजेपी के तरफ से विधानसभा प्रत्याशी कपिल मिश्रा ने कहा कि 8 तारिक को पाकिस्तान और इंडिया का मैच होगा. BCCI के वेबसाईट पर ऐसे किसी मैच के बारे मे कोई जानकारी नहीं है. शायद ये क्रिकेट का नहीं किसी और मैच का बात किया जा रहा था, कपिल मिश्रा ये भी बता देते इस मैच को प्रसारण कहाँ किया जाएगा. कपिल मिश्रा ये भी बता पाएंगे कि अगर बीजेपी दिल्ली हार गई तो क्या उनके खिलाफ वोट देने वाले दिल्ली के सभी मतदाता पाकिस्तानी बन जाएंगे? क्या ऐसा बोलना चुनावी प्रक्रिया का अपमान नहीं है?

भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रवेश वर्मा एक सभा में कहते हैं “जब दिल्ली में मेरी सरकार बनेगी तो 11 फरवरी के बाद एक महीने में मेरी लोकसभा में जितनी भी मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी हैं, उनमें से एक मस्जिद भी नहीं छोड़ूँगा. सारी मस्जिद हटा दूँगा.” क्या चुनाव के समय इस तरह का बयान सांप्रदायिक माहौल को ख़राब नहीं कर रहा? क्या भाजपा की दिल्ली में ऐसी स्थिति है की पार्टी के सांसद लोगों से मस्जिद तोड़ने के नाम पर वोट माँग रहे हैं? क्या सच में दिल्ली की जनता की बस इतनी समझदारी बची है की वे बाक़ी सभी मुद्दों को छोड़कर अब मस्जिद तोड़ने के लिए वोट देगी? इन सवालों का जवाब अब 11 को दिल्ली चुनाव के परिणाम के बाद ही पता चलेगा.

प्रवेश वर्मा ने एक अन्य बयान में कहा है की 11 फरवरी की भाजपा को बहुमत मिल गया तो एक घंटे में शाहीन बाग ख़ाली कर लिया जाएगा, लेकिन शायद अमित शाह के तरह प्रवेश वर्मा को भी याद नहीं रहा होगा की दिल्ली के लॉ एंड ऑर्डर यानी दिल्ली पुलिस अभी भी मोदी सरकार के पास है, अगर शाहीन बाग को ख़ाली कराना है तो अभी भी करा सकते हैं उसके लिए दिल्ली में सरकार होने की क्या ज़रूरत है? मतलब प्रवेश वर्मा को भी पता उनको बस शाहीन बाग का इस्तेमाल करना है और कुछ भी ऐसा बोलना है जिससे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण हो.

भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने दिल्ली के लोगों को शाहीन बाग में जमा भीड़ की बात कर लोगों की बहन बेटियों को उठाने और रेप करने की बात कर डराने का भी प्रयास कर रहे हैं. प्रवेश वर्मा के अनुसार, मोदी ही मदद कर सकते हैं मोदी ही बचा सकता हैं. ये बयान अपने आप में हास्यास्पद है, चुनाव में कोई चेहरा है नहीं, पार्टी के पास कोई मुद्दा है नहीं, जिस लॉ एंड ऑर्डर से भीड़ को हटाया जा सकता है वो अभी भी मोदी जी की सरकार के पास ही है तो दिल्ली पुलिस क्यों कुछ नहीं कर रही? क्यों बात तक नहीं किया जा रहा सरकार की ओर से? बस मोदी जी के नाम को भुनाया जा रहा है. लगे हाथ भाजपा सांसद ये भी बता देते की अभी तक कितनों को मोदी जी ने बचाया कितनों को मदद किया है. जब पार्टी के नेताओं और मंत्रियों के पर सीधे यौन उत्पीड़न से लेकर बलात्कार तक के आरोप लगे, जेल जाना पर, दोषी भी पाए गए तब तो मोदी जी ने कुछ नहीं बोला ना पीड़ित परिवारों को कोई सहायाता या सहाणभूति दी. लेकिन चल जब तक PM मोदी का नाम चल रहा पार्टी चला रही है.

फिलहाल, जिस तरह से हिंदू-मुस्लिम और झूठ के सहारे दिल्ली में भाजपा चुनाव प्रचार कर रही उसका एक और नमूना दिल्ली के सभी सांसदों ने दिया है. दिल्ली के सभी सात सांसदों हालाँकि की अमित शाह ने 8 बोल दिया था कोई बात नहीं ग़लती हो जाती है किसी से भी हो सकती है, दिल्ली के भाजपा सांसदों ने अपने क्षेत्र के स्कूल का फोटो-विडीओ शेयर किया जिसमें में दावा किया गया की केजरीवाल सरकार के अच्छे स्कूल का दावा गलत है, पर बाद में इन सांसदों के विडीओ ही गलत साबित हो गया. दिल्ली के शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रेस कोन्फ़्रेन्स करके भाजपा के सांसदों के स्टिंग के पोस्टमार्टम कर दिया.

ये सच है की केजरीवाल सरकार में दिल्ली में सरकारी स्कूल के हालातों में बहुत सुधार हुवा है, कई राज्यों और कई देशों ने भी दिल्ली के सरकारी स्कूल के मॉडल को सराहा है. मुफ़्त बिजली और मुफ़्त पानी के साथ-साथ महिलाओं का बस का किराया भी मुफ़्त किया गया लेकिन क्या भाजपा या कांग्रेस कभी भी इस बात को स्वीकार कर सकती है? शायद नहीं क्योंकि वो पार्टी के पॉलिटिक्स में फ़िट नहीं करेगा. भाजपा केजरीवाल की सबसे बड़ी उपलब्धि माने जाने वाले शिक्षा वेवस्था और स्कूल को बदनाम करने के लिए इतने आगे जाना भी उचित नहीं है. मनीष सिसोदिया ने प्रेस कोन्फ़्रेन्स करके मीडिया के समने दिखाया की किस तरह से भाजपा बंद हो चुके स्कूल और परिसर में मौजूद प्रयोग नहीं होने वालों कमरों का फोटो सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाया है.

यही होता है जब किसी पार्टी को चुनाव में कोई चेहरा नहीं हो और ना कोई मुद्दा हो मौजूदा सरकार को घेरने का; बयान चाहे कपिल मिश्रा का हो या अनुराग ठाकुर का या प्रवेश वर्मा का या किसी अन्य पार्टी के किसी भी नेता का ऐसा बयान क्यों ना हो, ऐसे बयानों से दिल्ली का भला नहीं होने वाला है, ये नेताओं को भी पता है लेकिन हिंदू-मुस्लिम अभी टेस्टेड फ़ोर्मुला है तो नेता इस्तेमाल कर रहे हैं. नेताओं को भरोसा है की लोग खास कर उनके समर्थक किसी भी झूठ को मान लेंगे, कोई देखने नहीं जाएगा सच में स्कूल अच्छा है या ख़राब, नेताओं को ये भी पता है की अगर झूठ पर कोई सवाल उठाया तो समर्थक और ट्रोल उसे अर्बन नक्सल और देशद्रोही भी साबित करने लगेंगे इसलिए सफ़ेद झूठ हिंदू-मुस्लिम वाले बयान दिए जा रहे हैं, जब तक जनता इन बातों पर चल रह तब तक ऐसे बयानो का इस्तेमाल किया जाता रहेगा.

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