बिहार STET का Admit Card जारी, बाढ़ और कोरोना से जूझ रहे छात्रों के लिए परीक्षा केंद्र पहुँचना एक नई आफत

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बिहार में 5 September तक 1,45,861 कोरोना पॉज़िटिव केस समने आए हैं जिनमे अभी भी 16,734 से अधिक ऐक्टिव मामले हैं और हर दिन सबसे अधिक मामले पटना और आस पास के जगहों से आ रहे हैं, पटना में अभी भी 2100 से अधिक ऐक्टिव कोरोना पॉज़िटिव केस है. ऐसे हालात में बिहार सरकार पूरे राज्य से STET के परीक्षार्थियों को पटना बुला रही, समझ नहीं आ रहा ये कोरोना से लड़ने का कोई अनोखा तरीक़ा है जिसके लिए नीतीश कुमार और सुशील मोदी को संयुक्त रूप से नोबेल प्राइज़ देना चाहिए या बिहार सरकार ने ये निर्णय लिया है ताकि कोरोना पटना के तरह हीं पूरे राज्य में फैले.

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है बिहार के जनता को परेशान करने की. ये बात कतई खुश होने वाली नहीं है की नीतीश सरकार बिहार में युवावों को रोज़गार के अवसर देने का प्रयास कर रही है. बिहार के बारे में जानकारी रखने वालों को पता है बिहार के लोग राजनीतिक रूप से सजग और बहुत समझदार होते हैं, इसलिए नीतीश कुमार या उनके मंत्री इस भ्रम में बिलकुल नहीं रहें की लोगों को पता नहीं चल रहा की सरकार क्या कर रही है, और क्यों अभी बाढ़ तथा कोरोना के दोहरी मार झेल रहे लोगों को STET का लेमनचूस दिया जा रहा.

नवोदय टाइम्स में आए एक ख़बर के अनुसार बिहार में कुल 16 ज़िले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और लगभग 83 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. लेकिन अब सरकार जनता और नियम क़ानून से बहुत ऊपर उठ चुकी है, आज के समय में मुद्दा वही है जो TV पर दिखता है, और TV पर दिन रात जो हो रहा वो किसी से छुपा नहीं है. TV पर जरूरी बातों और देश के नागरिकों से जुड़ी जरूरी मुद्दों के अलवा सभी बातें हो रही है. कही किसी TV चैनल या अख़बार में सरकार की विफलता की बात नहीं की जाती, हर तरफ से जनता को वही() बनाया जा रहा जो लिखा नहीं जा सकता, लोग बन भी रहे हैं.

राज्य की जनता के बीच पूरी तरह से अपनी लोकप्रियता खो चुके नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव के लिए इतने उतावले हैं की युवाओं के जान तक को जोखिम में डाला जा रहा. ये परीक्षा लेने का तरीक़ा तो नहीं है, हाँ शिक्षक बनने की आस में लगे बिहार के हज़ारों युवाओं की जान जोखिम में डालने का प्रपंच ज़रूर मालूम होता है. सरकार चाहती है की बिहार के कोने-कोने से युवा भाग दौड़ करे पटना और आस पास के जगहों पर परीक्षा देने के बहाने ताकि पूरे राज्य में ये झूठा माहौल बनाया जा सके की सब सामान्य है, सरकार बाढ़ और कोरोना को संतुलित करने में पूरी तरह विफल होने की बात को स्वीकार नहीं सकती इसलिए लोगों में ‘सब चंगा सी’ वाला भ्रम पैदा करना चाह रही है.

क्या बिहार की जनता और ख़ासकर युवा ये नहीं समझते की क्यों सरकार चुनाव के ठीक पहले परीक्षा लेने के लिए उतावली हो रही? क्या बिहार के युवा नहीं जानते की जब एक बार STET परीक्षा सही सही हो गयी तो फिर क्यों रिज़ल्ट की घोषणा के बाद और रिज़ल्ट जारी होने के कुछ दिन पहले अचानक परीक्षा कैन्सल कर दिया गया. जिन परीक्षा केंद्रों से अनियमितता की शिकायत आयी वहाँ दोबारा परीक्षा लिए जाने के महीनों बाद क्यों सरकार ने परीक्षा को रद्द किया? अगर किसी दो तीन परीक्षा केंद्रों के कारण पूरे राज्य का परीक्षा रद्द करना ही था तो क्यों उन परीक्षा केंद्रों पर दोबारा परीक्षा ली गई? बिहार में डबल इंजन की सरकार ये किस नशा में है, जो सही सही परीक्षा होने के बाद महीनो बेहोश (हाई) रहती है और रिज़ल्ट के समय होश आने पर बिना कुछ सोचे समझे परीक्षा कैन्सल कर देती है!

अभी बिहार में परिवहन के उचित साधन नहीं है, कहीं लोग कोरोना के कारण फँसे हैं तो कही बाढ़ के कारण ऐसे में कितने लोग परीक्षा में शामिल हो पाएँगे या जो होंगे उन्हें कितनी परेशानी होगी इसका अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता लेकिन इससे नीतीश कुमार को कुछ लेना देना नहीं है. बिहार में हज़ारों ऐसे परीक्षार्थी हैं जो एक-एक दो-दो  साल से बिहार सरकार के विभिन्न परीक्षाओं के रिज़ल्ट आने का इंतेज़ार कर रहे, अगर सरकार में गुर्दा है तो पुराने सभी पेंडिंग रिज़ल्ट जारी करें और जिन लोगों का रिज़ल्ट फ़ाइनल हो गया है उन्हें योगदान करा ले क्योंकि हज़ारों लोग ऐसे भी हैं जो सारी प्रक्रिया पूरी कर योगदान के इंतेज़ार में हैं.

इन बातों से ये पता चलता है की सरकार को परीक्षा लेने या राज्य में युवाओं को नौकरियाँ देने में कोई रुचि नहीं है, सिर्फ़ और सिर्फ़ STET के युवावों से पूरे राज्य में परेड करनी चाह रही ताकि चुनाव का माहौल बनाया जाए, सरकार बताना चाह रही है की तुम्हें शिक्षक बनने के बाद भी ऐसे दौड़ाया और भगाया जाएगा, गलती से भी सम्मान कि उम्मीद मत कर लेना. जहाँ तक STET परीक्षा की बात है, तो किसी ना किसी कारण से फिर से रद्द कर दी जायगी, वो फिर कोर्ट का बहाना हो या कोई और; क्योंकि शायद हीं बिहार में नौकरियाँ सम्बंधित कोई प्रक्रिया होगी जो एक बार में पूरी की गयी हो या जिसे एक या दो बार रद्द ना किया गया हो. STET के माध्यम से नौकरी की उम्मीद लगाए लोगों को समझना होगा की ये लम्बी प्रक्रिया है जो फ़िलहाल कहीं से पूरी होती हुई नहीं दिख रही.

इन सवालों से लोग सरकार की नीयत पर संदेह कर रहे हैं:

अनुचित तरीक़े से रद्द की गई परीक्षा: सरकार का STET परीक्षा रद्द करने का फैसला समझ से बिल्कुल परे है, जब अनियमितता की शिकायत वाले परीक्षा केंद्रों पर दोबारा परीक्षा ली गई फिर क्यों महीनों बाद रिज़ल्ट के ठीक पहले कैन्सल किया गया? वो भी तब जब STET के वेबसाइट पर रिज़ल्ट के तिथि की घोषण भी कर दी गयी थी. अगर सब ठीक था तो परीक्षा क्यों कैन्सल की गई और सब ठीक नहीं था तो कैसे रिज़ल्ट की तिथि की घोषणा कर दी गयी? कहीं ऐसा तो नहीं की सरकार के नाक के नीचे धांधली हो रही और कुर्सी के नशे में धुत्त सरकार को कुछ ख़बर नहीं. परीक्षा रद्द करने को लेकर कई विद्यार्थी और विद्यार्थी संगठन कोर्ट भी जा चुके हैं.

कोरोना और बाढ़ जैसे गम्भीर हालात में परीक्षा कराना: बिहार के छोटे बच्चों को भी समझ है की चुनाव के लालच में नीतीश कुमार की सरकार परीक्षा लेने की व्याकुलता दिखा रही है, क्योंकि दिखाने को और कुछ है नहीं. एक तरफ देश में हर दिन 80 हज़ार के लगभग कोरोना पॉज़िटिव मामले समने आ रहे हैं और बिहार के आधे हिस्से में लोग बाढ़ की मार झेल रहें हैं, क़रीब 83 लाख लोग बिहार में बाढ़ से प्रभावित हैं और इस हालात में सरकार पूरे राज्य के युवाओं को ऐसे जगह बुला रही परीक्षा के लिए जहाँ हर दिन राज्य के सबसे अधिक कोरोना के मामले सामने आ रहे और जहाँ बाढ़ प्रभावित लोगों के पहुँचना बेहद कठिन है.

बाढ़ और कोरोना के दोहरी मार झेल रहे लोगों को क्यों बुलाया जा रहा पटना, क्यों ज़िला मुख्यालयों में नहीं ली जा रही परीक्षा? दोबारा STET परीक्षा मुख्यतः पटना और दानापुर के आस पास के जगहों पर ली जाएगी और इन्हीं जगहों से सबसे अधिक कोरोना के मामले आ रहे हैं. परीक्षार्थियों को हीं नहीं बल्कि अभिभावकों को भी सोचना होगा की क्यों राज्य भर से छात्रों को पटना बुलाया जा रहा, क्यों जान बूझकर परेशान किया जा रहा है लोगों को? क्या सभी छात्रों के पास इतने पैसे होंगे की गाड़ी रिज़र्व करके परीक्षा देने पटना जा पाए? क्या अभी बसों और ट्रेनों में सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा नहीं है? क्यों नहीं पिछली परीक्षा के तरह हीं सभी ज़िला मुख्यालयों में परीक्षा कराई जा रही जिससे परीक्षा केंद्रों तक आने-जाने में छात्रों को कम परेशानी होती. क्या ये सब जबरन राज्य में माहौल सामान्य करने का प्रयास नहीं है? जिसके लिए बिहार के बेरोज़गार युवावों को जान जोखिम में डालने के लिए बाध्य किया जा रहा है.

क्यों छोटे-छोटे निजी कम्प्यूटर कोचिंग में कराई जा रही परीक्षा: अभी तक मिल रही जानकारी के अनुसार दोबारा होने जा रही STET की परीक्षा मुख्यतः निजी कम्प्यूटर कोचिंग में कराई जा रही है, जब सरकारी संस्थानों में हो रही परीक्षा के दौरान राज्य की राजधानी पटना में धड़ल्ले से किताब खोल कर और मोबाइल फोन के मदद से परीक्षा दी जा रही थी तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है की एक निजी कम्प्यूटर कोचिंग में क्या कुछ हो सकता है. कहीं सरकार ने इसीलिए तो परीक्षा रद्द नहीं किया? लोगों को ये शंका क्यों नहीं हो की परीक्षा के नाम पर बहुत बड़े स्तर पर धांधली को अंजाम दिया जाएगा?

इस बूढ़ी और निकम्मी सरकार से उम्मीद तो नहीं की जा सकती लेकिन बिहार के बेरोज़गार युवावों के भले के लिए सिर्फ़ प्रार्थना कर सकते हैं, क्योंकि भगवान भरोसे हीं तो बिहार सालों से चल रहा, मुश्किल है पर अब वही भगवान नीतीश सरकार को सदबुद्धि दे सकते हैं ताकि राज्य के हज़ारों युवावों को कोरोना और जानलेवा परेशानी से राहत मिल पाए.

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